शासन के आदेश के विपरीत कार्य कर रहे आरएमओ,  जिला अस्पताल में 8 सिविल सर्जन बदल गए, किन्तु नहीं बदले आरएमओ

धार। जिला अस्पताल में आरएमओ का मलाईदार पद हैं।उक्त मलाईदार पद पर विगत लगभग 15 वर्षों से डॉ संजय जोशी ने शासकीय नियमों को धता बताते हुए कब्जा कर रखा है।विगत लगभग 15 वर्षों में 8 सिविल सर्जन बदल गये किन्तु आरएमओ डॉ संजय जोशी अंगद की तरह आरएमओ के मलाईदार पद पर अपने राजनीतिक रसूख के दम पर काबिज हैं।

शासकीय नियमों को व आदेश का कर खुलेआम उल्लंघन

स्वास्थ्य आयुक्त भोपाल एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के आदेश की अवहेलना करते हुए आरएमओ का मलाईदार पद छोड़ने को तैयार नहीं है। सीएमएचओ कार्यालय से दो बार आदेश जारी होने के बाद भी आरएमओ डॉ संजय जोशी अपने वरिष्ठ अधिकारी के आदेश का पालन नहीं करते हुए खुलेआम उल्लंघन कर वरिष्ठ अधिकारी को चुनोती दे रहे हैं। डॉ जोशी राजनीतिक रसूखदार एवं जोड़तोड़ में माहिर माने जाते हैं।

स्वास्थ्य आयुक्त क्या हैं निर्देश

स्वास्थ्य आयुक्त ने समस्त सीएमएचओ को आदेश जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिला क्षय अधिकारी को जिला अस्पताल के अन्य कार्यो का दायित्व नहीं सौपा जावे। क्षय अधिकारी राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की वृद्धि की उपलब्धियों पर अपना ध्यान केंद्रित करेंगे। विगत कुछ वर्षों में राज्य की उपलब्धि में गिरावट देखी जा रही हैं।

क्षय अधिकारी के पास जिला अस्पताल के अन्य प्रभार होने के कारण जिला राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम प्रभावित होता है और टीवी मरीजों को निरन्तर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ विलम्ब से उपलब्ध हो पा रहा हैं। जिसके कारण का राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम प्रभावित हो रहा है।

डॉ जोशी जिला अस्पताल के सभी पदो पर काबिज

डॉ संजय जोशी जिला अस्पताल में विगत एक दशक से अधिक समय से जिला अस्पताल की प्रमुख शाखाओं के नोडल अधिकारी बने हुए हैं। प्रमुख रूप से डॉ जोशी के पास जिला क्षय अधिकारी, आरएमओ, रोगी कल्याण समिति, अस्पताल प्रबंधन के नोडल अधिकारी, मरम्मत निर्माण कार्य, सामग्री क्रय करने से लेकर, विधुत सामग्री खरीदी, आदि महत्वपूर्ण सभी शाखाओं के प्रभारी हैं।

प्रसूताओं को नहीं मिलते लड्डू, फल फ्रूट, दूध ब्रेड, बिस्किट, आधी सामग्री अधिकारी व कर्मचारियों के घर

प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रसूताओं महिलाओं के लिए लड्डू दिए जाने के निर्देश दिये थे, किन्तु योजना जब प्रारम्भ हुई थी तब ही एक दो बार ही जिला अस्पताल में लड्डू बांटे गये थे, उसके बाद से आज तक प्रसूताओं महिलाओं को लड्डू नहीं मिले हैं। लड्डू के अलावा फल फ्रूट, दूध, ब्रेड, बिस्किट आदि भी दिया जाता हैं जो कि अस्पताल के अधिकारी व कर्मचारियों के घर पहुंच जाते हैं। अस्पताल में मरीजों को पोष्टिक भोजन भी नहीं दिया जाता हैं। पानी जैसी दाल, सब्जी दी जाती हैं।

तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की ड्यूटी में होता है हेरफेर

जिला अस्पताल में चतुर्थ श्रेणी व स्टॉफ नर्सेस कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाने में आरएमओ कार्यालय द्वारा मनमर्जी व हेराफेरी की जाती हैं। कुछ कर्मचारी तो मात्र हस्ताक्षर कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं। कुछ निर्धारित समय पर नहीं आते हैं। आधे कर्मचारी ड्यूटी पर उपस्थित रहते हैं। जिला अस्पताल में मरीजों के परिजन स्ट्रेचर को धकेलते हुए देखे जा सकते हैं। आरएमओ कार्यालय इन सब कर्मचारियों से मिलीभगत व सेटिंग से काम चलता है। जिससे अस्पताल की साफ सफाई व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था, प्रबंधन प्रभावित होता है।

मामला विभागीय अधिकारियों की जानकारी में है

विगत एक दशक से जिला प्रशासन के आला अधिकारियों ने कई बार अस्पताल का निरीक्षण किया। जिला अस्पताल की व्यवस्था को सुधारने के लिए अन्य विभागों के विभागीय अधिकारियों व डिप्टी कलेक्टर, एसडीएम की प्रतिदिन निरीक्षण करने के लिए तत्कालीन जिला कलेक्टर ने ड्यूटी लगाई गई। किन्तु जिला अस्पताल के लापरवाह, कर्मचारियों को संरक्षण देने वाले आरएमओ जब तक रहेंगे जिला अस्पताल की व्यवस्था में सुधार होना सम्भव नहीं है। एक मछली ही सारे तालाब को गंदा कर रही हैं।

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