संविधान की भावनाओं से खिलवाड़, अकेला पाकर पत्रकार को डराया ओर मारा ।

कानपुर । लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए मीडिया को स्वतंत्र छोड़ देना आवश्यक है ताकि वह सरकार और नौकरशाह के द्वारा किए गए गलत और सही कार्यों को जनता तक पहुंचा कर जन-जन को लाभान्वित करें। लेकिन नौकरशाही का यह अंदाज की लोकतंत्र को कायम रखने वालों पर नौकरशाह चाबुक चलाते नजर आ रहे हैं। शायद यह भारतीय संविधान के मूल तत्व को नष्ट करने जैसा है। खैर यह भारत में कोई नया नहीं है इससे पूर्व भी अंग्रेजों के शासन काल में पत्रकारों की स्वतंत्रता पर चाबुक चलता रहा है लेकिन जब स्वतंत्र भारत में यह चाबुक चलता है तो भारतीय संविधान के साथ भारत का स्वतंत्र स्वरूप भी रो देता होगा ।

यहां यह कहना गलत नहीं होगा की भारत के चार स्तंभों में चौथा स्तंभ इतना महत्वपूर्ण है की यदि चौथा स्तंभ आईना ना दिखाएं तो भारत फिर गुलामी की गर्त में चला जाएगा। अभी हाल ही में नौकरशाही का तानाशाही अंदाज नजर आया जब पनकी इंडस्ट्रियल एरिया के चौकी इंचार्ज अमित तिवारी और सिपाही ने अपने घूसखोरी मार्ग में अवरोध उत्पन्न कर रहा पत्रकार को अकेला पाकर धमकाया और मारा।

लेकिन जब पत्रकार के साथी चौकी आए। तो वह एक अपराधी की तरह भाग निकला खैर यहां अधिकारियों को चाहिए की वह अपराधी दरोगा और सिपाही को सस्पेंड करने के साथ ही मानहानि का मुकदमा दर्ज और मारपीट का मुकदमा दर्ज और मौके से अपराध करके भाग जाने का मुकदमा दर्ज करके कारावास का रास्ता दिखाएं।

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